महाराष्ट्र में रोड साइड सुविधाएं देने में फेल हुई राज्य सरकार

देश में रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर को एडवांस में टैक्स जमा करवाने के बावजूद सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता। सरकारें इस सेक्टर के लिए कोई योजनाएं नहीं बनाती। हाईवे तो बन रहे हैं लेकिन ड्राइवरों के लिए किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। न टॉयलेट्स की व्यवस्था है, न आराम करने की। यही नहीं लिंक रोड्स की तो हालत खराब है। गड्ढों के कारण हादसों का खतरा बना रहता है। रोड रॉबरी और पुलिसिया भ्रष्टाचार ट्रांसपोर्टरों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बना हुआ है।

  • शिपिंग इंडस्ट्री के हालात काफी खराब, दुबई से आने वाले शिप वापसी में कंटेनर के लिए पैसे लेने के बजाय देते हैं ताकि उन्हें कम मिल जाए
  • महाराष्ट्र में ऐसी कोई सड़क नहीं जिसपर गड्ढे न हों, कई बार लेटर लिखे लेकिन सुनवाई नहीं ह गाड़ियों को रफ्तार देने के लिए
  • एक्सप्रेस-वे बनाना और फिर रफ्तार पर लगाम कसने के लिए स्पीड गवर्नर जैसे आदेश लागू करना ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री को बर्बाद करने के बराबर है।
  •  ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ड्राइवरों को अच्छी सैलरी, सम्मान व सुविधाएं नहीं मिलतीं इसलिए लोग इस पेशे से मुंह मोड़ रहे हैं। यह सेक्टर तभी आगे बढ़ेगा जब ड्राइवर्स के काम को तवज्जो मिलेगी

इसी सिलसिले में ट्रांसपोर्ट टाइम्स ने बात की महाराष्ट्र हैवी व्हीकल एंड इंटरस्टेट कंटेनर एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रवीन पैथंकर से। पेश है बातचीत के मुख्य अंश:-
एसोसिएशन का गठन किस प्रकार हुआ। इसकी उपलब्धियां क्या रहीं हैं?
महाराष्ट्र में एक-दो गाड़ियों वाले काफी ट्रांसपोर्टर थे लेकिन आए दिन कोई न कोई समस्या पैदा होती रहती थी। कभी पोर्ट वालों से लड़ाई तो कभी ट्रैफिक पुलिस वालों का अत्याचार। काफी कुछ अव्यवस्थित था। फिर सभी ने मिलकर बैठक की और समस्याओं के बारे में बात की तो इस नतीजे पर पहुंचे कि ट्रांसपोर्टर संगठित नहीं है, इसलिए उसे प्रताड़ित किया जाता है। 1996 में महाराष्ट्र हैवी व्हीकल एंड इंटरस्टेट कंटेनर एसोसिएशन का गठन किया गया। इसमें छोटे से छोटे ट्रांसपोर्टर को जोड़ा गया। इसके बाद कानूनी तौर पर एसोसिएशन का संविधान बनाया गया। इसके सभी मैंबरों को समान अधिकार प्राप्त हैं। यहां सभी को वोट डालने का अधिकार है। और किसी से भेदभाव नहीं किया जाता। महाराष्ट्र में इंटरस्टेट कंटेनर और हैवी व्हीकल का 80 फीसदी काम एसोसिएशन के पास है। एसोसिएशन के साथ करीब 27 हजार हैवी व्हीकल व कंटेनर जुड़े हुए हैं जो देशभर में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के काम में जुटे हुए हैं।congress-opposes-entry-tax-on-local-commercial-vehicles-in-goa
मोटर व्हीकल एक्ट में प्रस्तावित संशोधन में ओवरलोडिंग पर काफी ज्यादा जुर्माने का प्रावधान है। क्या इस तरह ओवरलोडिंग खत्म हो पाएगी?
ओवरलोडिंग खत्म करने को हम काफी समय से लड़ रहे हैं। क्या यह बंद हुई। लेकिन अब इसमें काफी कमी आई है। सरकार तो बस मौका ढूूंढ़ती है ट्रांसपोर्टरों को लूटने का। नए नियमों से भ्रष्टाचार बढ़ेगा क्योंकि पुलिस तो बहाना बनाकर ट्रकों को रोक लेती है। मौके पर कोई वजन तोलने वाली मशीन तो होती नहीं। पुलिसवाले डरा धमकाकर पैसे ऐंठ लेते हैं। इन नए नियमों से ज्यादा कुछ बदलने वाला नहीं है। सरकार ट्रांसपोर्टरों को पहले सुविधाएं तो दे, फिर चाहे कोई भी निर्देश दे, उसे मानने को ट्रांसपोर्टर बाध्य होगा लेकिन सरकार का सुविधाएं देने पर तो ध्यान ही नहीं है। लोगों को पता होता है कि मर्डर करने पर सजा होगी लेकिन क्या मर्डर कम होते हैं। इसलिए लोगों में जागरूकता लाना और उन्हें सुविधाएं देना जरूरी है। जुर्माना बढ़ाना समस्या का हल नहीं है। उन्हें जागरूक करना चाहिए।
महाराष्ट्र में ट्रांसपोर्टरों के लिए रोड साइड एमिनिटीज उलपब्ध करवाई हैं, क्या उनका पूरा लाभ मिल रहा है?
यह सिर्फ कहने की बात है। सरकार ने 1300 करोड़ रुपए खर्च कर महाराष्ट्र में 22 चेक पोस्ट बनानी थी लेकिन अभी तक सिर्फ पांच ही तैयार हो पाई हैं। लेकिन यहां सुविधाओं के नाम पर सिर्फ लूटा जा रहा है। वहां साफ सफाई की व्यवस्था नहीं है। सभी कमरे खराब पड़े हैं। वहां सोना तो दूर बैठा भी नहीं जा सकता। टॉयलेट खराब पड़े हैं। यही नहीं किसी भी सुविधा का लाभ उठाने के लिए अलग-अलग रेट लगाए गए हैं जो ट्रक चालक या कंडक्टर वहन नहीं कर सकता। ऐसी सुविधाएं देने का क्या फायदा जिनता लाभ ड्राइवर उठा ही नहीं पाएं।
महाराष्ट्र में रोड ट्रांसपोर्ट सेक्टर को आए दिन किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है?
ट्रांसपोर्ट सेक्टर ही एकमात्र सेक्टर है जो एडवांस में सभी तरह के टैक्स भरता है। उसके बावजूद किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती। हमसे लिए हुए पैसे का इस्तेमाल हमें सुविधाएं देने के लिए नहीं किया जाता। एक्सप्रेस वे बनाए जाते हैं, सड़कें बनाई जाती हैं लेकिन क्या आज तक सरकार ने सोचा है कि कुछ किलोमीटर बाद टॉयलेट्Þस बनाए जाने चाहिए। पीने के पानी की सुविधा होनी चाहिए। ड्राइवरों के आराम करने को भी आरामगाह बनाए जाने चाहिए। बातें सभी बड़ी-बड़ी करते हैं लेकिन कोई काम करने को तैयार नहीं है। अगर कर्नाटक कर सकता है तो फिर महाराष्ट्र क्यों नहीं। यही नहीं लिंक रोड्स पर डेढ़ से दो फीट के गड्ढे पड़े हुए हैं। ऐसा हाल किसी एक शहर का नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र का है। लेकिन मंत्री व अधिकारी इस ओर ध्यान ही नहीं देते।
कोई अफसर या मंत्री भविष्य की योजनाओं पर काम नहीं करता। जगह सिकुड़ती जा रही है जिस कारण गाड़ियों की रफ्तार कम हो रही है। हमारे देश में एक गाड़ी दिन में 150 किलोमीटर से ज्यादा नहीं चल पाती जबकि विदेशों में 600 से 700 किलोमीटर एवरेज है। इसलिए पहले गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने के लिए भविष्य की योजनाओं पर काम करना होगा।

महाराष्ट्र हैवी व्हीकल एंड इंटरस्टेट कंटेनर एसोसिएशन
1976  में बनी
27,000  ट्रक शामिल
80%   हैवी व्हीकल्स का काम
एसोसिएशन के पास

ड्राइवरों की कमी से ट्रांसपोर्ट इंडस्ट्री जूझ रही है, इसका क्या कारण है?
हमारे देश में ड्राइवरों के काम को जीरो वैल्यू वाला समझा जाता है। उनके काम की वेल्यू नहीं समझी जाती। और जब तक ड्राइवरों का काम को तवज्जो नहीं दी जाएगी, इंडस्ट्री कभी फल फूल नहीं सकती। ड्राइवरों को बेहतर सैलरी देनी चाहिए। उनका भविष्य को सिक्योर करने के लिए पीएफ काटना चाहिए। हर 100 या 200 किलोमीटर पर उनके रेस्ट की सुविधा होनी चाहिए। खाने-पीने की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। हाईवे पर लूट पाट में कमी आनी चाहिए। पुलिस व रोड इंस्पेक्टरों द्वारा की जा रही लूट में कमी आनी चाहिए। ऐसा नहीं है इसलिए लोग ड्राइवर की जॉब के बजाय सिक्योरिटी में चल ेजाते हैं ताकि वे खुद को सिक्योर महसूस करें। सरकार को ड्राइवरों की सुविधाओं के बारे में विदेशों की तर्ज पर योजनाएं बनानी चाहिए।
वाटरवेज शुरू होने से रोड ट्रांसपोर्ट पर क्या असर पड़ेगा?
रोड ट्रांसपोर्ट पर इसका ज्यादा असर नहीं पड़े क्योंकि वाटरवेज पोर्ट टू पोर्ट काम करेगा लेकिन वहां से फिर रोड ट्रांसपोर्ट के जरिए ही सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाएगा। हमारे देश में आज ट्रांसपोर्टेशन के कई साधन हैं। लेकिन कोई भी फायदे में नहीं है। यह कहने की बात है कि ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट कम होगी और इससे काफी लाभ मिलेगा। इसमें ज्यादा खर्च होगा क्योंकि पहले शिप से सामान जाएगा। उसके बाद फिर ट्रकों से ही सामान जाएगा। हमारे इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट के जितने भी शिप आते हैं सभी लॉस में चल रहे हैं। बहुत बुरी स्थिति है उनकी। हम अगर यहां से दुबई कंटेनर भेजते हैं तो शिपिंग कंपनी पैसा लेती नहीं है उल्टा हमें 50 डॉलर देती है क्योंकि उनके पास काम नहीं है।
स्पीड गवर्नर पर आपका क्या कहना है?
हमारे देश में जब भी कोई हादसा होता है तो उसे रफ्तार से जोड़कर देखा जाता है। उसी का कारण है कि गाड़ियां में स्पीड गवर्नर लगाने के निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन हादसे के असल कारण तक कोई नहीं पहुंचता। सबसे पहले इसकी जांच होनी चाहिए कि हादसा हुआ क्यों। इसका कारण क्या था। यदि अमेरिका में रोड पर एक एक्सीडेंट होता है तो उसकी पूरी पड़ताल की जाती है जबकि हमारे यहां कॉमर्शियल वाहनों को कारण मान लिया जाता है। यह ठीक नहीं है। महाराष्ट्र में सड़कों की हालत खराब है। भीड़ बढ़ती जा रही है लेकिन इसे दुरुस्त करने के प्रति सरकार की कोई योजना नहीं है। इसलिए पहले सरकार को आगामी 10 से 20 साल भविष्य को ध्यान में रखकर योजनाएं बनानी चाहिए। रफ्तार पर लगाम लगाना ट्रांसपोर्ट सेक्टर को बर्बाद करने वाला काम है।
ट्रक ड्राइवरों व कंडक्टरों के लिए आपकी एसोसिएशन किसी तरह के कार्यक्रम आयोजित करते हैं?
हमारी एसोसिएशन ट्रक ड्राइवरों के लिए आईचैकअप कैंप, मेडिकल कैंप आदि का समय-समय पर आयोजन किया जाता है। वे लंबे सफर पर जाते हैं और एसोसिएशन का फर्ज बनता है कि उनका स्वास्थ्य चैकअप करवाए ताकि वे सफर के दौरान स्वस्थ रहें। रोड सेफ्टी वीक का हर साल आयोजन किया जाता है जिसमें उन्हें ट्रैफिक रूल्स के बारे में जानकारी दी जाती है। जागरूकता कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है।

 

Source : http://goo.gl/QlSnrs

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